Hindi Poems on Nature – प्रकृति पर आधारित सुंदर कविताएं | Poems On Nature in Hindi

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Hindi Poem On Nature
Hindi Poem On Nature

11 Best Hindi Poems on Nature – प्रकृति पर आधारित सुंदर कविताएं

हैलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का हमारे वैबसाइट Mysarkari-result.com के हिन्दी Poem Category मे। आजके इस article मे आपके best Hindi Poems In Nature / Hindi Poem On Nature पढ़ने को मिलेगा , अर्थात प्रकृति पर आधारित हिन्दी कवितायेँ.

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प्रकृति हमें जीवन जीने की कला सिखाती है| प्रकृति में सभी
क्रियाएं बहुत ही सरलता के साथ होती है।  जैसे तारों का चमकना,  नदियों का निरंतर बहते रहना,  तथा सूर्य का उदय होना| हमें प्रकृति से
प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सरल रूप से जीना चाहिए| आइए पढ़ते हैं प्रकृति से संबंधित कुछ
प्रेरणादायक हिंदी कवितायें (Poem on Nature in Hindi)

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प्रकृति के कारण ही सब संभव है. कुदरत और हमारी प्यारी धरती के विषय पर दी गयी इन कविताओं के साथ-साथ आपके लिए videos  भी दिए गएँ हैं, जिनमे आप कविताओं को सुन भी सकते हैं. हम आशा करते है आपको सभी कवितायें / Hindi Poems On Nature पसंद आएँगी।

List of Hindi Poems On Nature (प्रकृति पर आधारित हिन्दी कविताओं की लिस्ट)

1- काँप उठी…..धरती माता की कोख !! (डी. के. निवातियाँ)

कलयुग में अपराध का

बढ़ा अब इतना प्रकोप

आज फिर से काँप उठी

देखो धरती माता की कोख !!

समय समय पर प्रकृति

देती रही कोई न कोई चोट

लालच में इतना अँधा हुआ

मानव को नही रहा कोई खौफ !!

कही बाढ़, कही पर सूखा

कभी महामारी का प्रकोप

यदा कदा धरती हिलती

फिर भूकम्प से मरते बे मौत !!

मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे

चढ़ गए भेट राजनितिक के लोभ

वन सम्पदा, नदी पहाड़, झरने

इनको मिटा रहा इंसान हर रोज !!

सबको अपनी चाह लगी है

नहीं रहा प्रकृति का अब शौक

“धर्म” करे जब बाते जनमानस की

दुनिया वालो को लगता है जोक !!

कलयुग में अपराध का

बढ़ा अब इतना प्रकोप

आज फिर से काँप उठी

देखो धरती माता की कोख !!

best poem on nature

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2- hindi poem about nature

चाहे बहे हवा मतवाली

चाहे बहे हवा लू वाली

फूल हमेशा मुस्काता

पत्तों की गोदी में रहकर

फूल हमेशा मुस्काता

कांटो की नोकों को सहकर

फूल हमेशा मुस्काता

ऊपर रह डाली पर खिलकर

फूल हमेशा मुस्काता

नीचे टपक धूल में मिल कर

फूल हमेशा मुस्काता

रोना नहीं फूल को आता

फूल हमेशा मुस्काता

इसलिए वह सबको भाता

फूल हमेशा मुस्काता |



3- poem in nature in hindi

जब तपता है सारा अंबर

आग बरसती है धरती पर|

फैलाकर पत्तों का छाता

सब को सदा बचाते पेड़|

पंछी यहां बसेरा पाते

गीत सुना कर मन बहलाते|

वर्षा, आंधी, पानी में भी

सबका घर बन जाते पेड़|

इनके दम पर वर्षा होती

हरियाली है सपने बोती|

धरती के तन मन की शोभा

बनकर के इठलाते  पेड़|

जितने इन पर फल लग जाते

ये उतना नीचे झुक जाते|

औरों को सुख दे कर के भी

तनिक नहीं इतराते पेड़|

हमें बहुत ही भाते पेड़

काम सभी के आते पेड़|

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अगर पेड़ भी चलते होते

कितने मजे हमारे होते

जहां कहीं भी धूप सताती

उसके नीचे बैठ सुस्ताते

बांध तने में उसके रस्सी

चाहे जहां कहीं ले जाते

लगती जब भी भूख अचानक

तोड़ मधुर फल उसके खाते

आती कीचड़ बाढ़ कहीं तो

झट उसके ऊपर चढ़ जाते

जब कभी वर्षा हो जाती

उसके नीचे हम छिप जाते

अगर पेड़ भी चलते होते

कितने मजे हमारे होते



5- बसंत का मौसम (इंदर भोले नाथ) hindi poem on
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है महका हुआ गुलाब

खिला हुआ कंवल है,

हर दिल मे है उमंगे

हर लब पे ग़ज़ल है,

ठंडी-शीतल बहे ब्यार

मौसम गया बदल है,

हर डाल ओढ़ा नई चादर

हर कली गई मचल है,

प्रकृति भी हर्षित हुआ जो

हुआ बसंत का आगमन है,

चूजों ने भरी उड़ान जो

गये पर नये निकल है,

है हर गाँव मे कौतूहल

हर दिल गया मचल है,

चखेंगे स्वाद नये अनाज का

पक गये जो फसल है,

त्यौहारों का है मौसम

शादियों का अब लगन है,

लिए पिया मिलन की आस

सज रही “दुल्हन” है,

है महका हुआ गुलाब

खिला हुआ कंवल है…!!

poem for 2 class in hindi

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6- मान लेना वसंत आ गया (डी. के. निवातियाँ) hindi poem nature prakriti

बागो में जब बहार आने लगे

कोयल अपना गीत सुनाने लगे

कलियों में निखार छाने लगे

भँवरे जब उन पर मंडराने लगे

मान लेना वसंत आ गया… रंग बसंती छा गया !!

खेतो में फसल पकने लगे

खेत खलिहान लहलाने लगे

डाली पे फूल मुस्काने लगे

चारो और खुशबु फैलाने लगे

मान लेना वसंत आ गया… रंग बसंती छा गया !!

आमो पे बौर जब आने लगे

पुष्प मधु से भर जाने लगे

भीनी भीनी सुगंध आने लगे

तितलियाँ उनपे मंडराने लगे

मान लेना वसंत आ गया… रंग बसंती छा गया !!

सरसो पे पीले पुष्प दिखने लगे

वृक्षों में नई कोंपले खिलने लगे

प्रकृति सौंदर्य छटा बिखरने लगे

वायु भी सुहानी जब बहने लगे

मान लेना वसंत आ गया… रंग बसंती छा गया !!

धूप जब मीठी लगने लगे

सर्दी कुछ कम लगने लगे

मौसम में बहार आने लगे

ऋतु दिल को लुभाने लगे

मान लेना वसंत आ गया… रंग बसंती छा गया !!

चाँद भी जब खिड़की से झाकने लगे

चुनरी सितारों की झिलमिलाने लगे

योवन जब फाग गीत गुनगुनाने लगे

चेहरों पर रंग अबीर गुलाल छाने लगे

मान लेना वसंत आ गया… रंग बसंती छा गया !!



7- मौसम बसंत का (शिशिर “मधुकर”)

लो आ गया फिर से हँसी मौसम बसंत का

शुरुआत है बस ये निष्ठुर जाड़े के अंत का

गर्मी तो अभी दूर है वर्षा ना आएगी

फूलों की महक हर दिशा में फ़ैल जाएगी

पेड़ों में नई पत्तियाँ इठला के फूटेंगी

प्रेम की खातिर सभी सीमाएं टूटेंगी

सरसों के पीले खेत ऐसे लहलहाएंगे

सुख के पल जैसे अब कहीं ना जाएंगे

आकाश में उड़ती हुई पतंग ये कहे

डोरी से मेरा मेल है आदि अनंत का

लो आ गया फिर से हँसी मौसम बसंत का

शुरुआत है बस ये निष्ठुर जाड़े के अंत का

ज्ञान की देवी को भी मौसम है ये पसंद

वातवरण में गूंजते है उनकी स्तुति के छंद

स्वर गूंजता है जब मधुर वीणा की तान का

भाग्य ही खुल जाता है हर इक इंसान का

माता के श्वेत वस्त्र यही तो कामना करें

विश्व में इस ऋतु के जैसी सुख शांति रहे

जिसपे भी हो जाए माँ सरस्वती की कृपा

चेहरे पे ओज आ जाता है जैसे एक संत का

लो आ गया फिर से हँसी मौसम बसंत का

शुरुआत है बस ये निष्ठुर जाड़े के अंत का

 nature poem in hindi in 8 lines

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8- जाड़ों का मौसम … (स्वाति नैथानी)

लो, फिर आ गया जाड़ों का मौसम ,

पहाड़ों ने ओढ़ ली चादर धूप की

किरणें करने लगी अठखेली झरनों से

चुपके से फिर देख ले उसमें अपना रूप ।

ओस भी इतराने लगी है

सुबह के ताले की चाबी

जो उसके हाथ लगी है ।

भीगे पत्तों को अपने पे

गुरूर हो चला है

आजकल है मालामाल

जेबें मोतियों से भरीं हैं ।

धुंध खेले आँख मिचोली

हवाओं से

फिर थक के सो जाए

वादियों की गोद में ।

आसमान सवरने में मसरूफ है

सूरज इक ज़रा मुस्कुरा दे

तो शाम को

शरमा के सुर्ख लाल हो जाए ।

बर्फीली हवाएं देती थपकियाँ रात को

चुपचाप सो जाए वो

करवट लेकर …

9- प्रकृति (डी. के. निवतियाँ) poem on nature in
hindi in 8 lines

सुन्दर रूप इस धरा का,

आँचल जिसका नीला आकाश,

पर्वत जिसका ऊँचा मस्तक,2

उस पर चाँद सूरज की बिंदियों का ताज

नदियों-झरनो से छलकता यौवन

सतरंगी पुष्प-लताओं ने किया श्रृंगार

खेत-खलिहानों में लहलाती फसले

बिखराती मंद-मंद मुस्कान

हाँ, यही तो हैं,……

इस प्रकृति का स्वछंद स्वरुप

प्रफुल्लित जीवन का निष्छल सार

10- फूल (शिशिर मधुकर) poem on nature in
hindi in 4 lines

हमें तो जब भी कोई फूल नज़र आया है

उसके रूप की कशिश ने हमें लुभाया है

जो तारीफ़ ना करें कुदरती करिश्मों की

क्यों हमने फिर मानव का जन्म पाया है.

 nature poem for class 4

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11- कुदरत hindi poem on nature for
class 4

हे ईस्वर तेरी बनाई यह धरती , कितनी ही सुन्दर

नए – नए और तरह – तरह के

एक नही कितने ही अनेक रंग !

कोई गुलाबी कहता ,

तो कोई बैंगनी , तो कोई लाल

तपती गर्मी मैं

हे ईस्वर , तुम्हारा चन्दन जैसे व्रिक्स

सीतल हवा बहाते

खुशी के त्यौहार पर

पूजा के वक़्त पर

हे ईस्वर , तुम्हारा पीपल ही

तुम्हारा रूप बनता

तुम्हारे ही रंगो भरे पंछी

नील अम्बर को सुनेहरा बनाते

तेरे चौपाये किसान के साथी बनते

हे ईस्वर तुम्हारी यह धरी बड़ी ही मीठी



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